18 साल बाद जाल में: हिजबुल का उल्फत, जो मुरादाबाद में रच रहा था तबाही

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18 साल बाद जाल में: हिजबुल का उल्फत, जो मुरादाबाद में रच रहा था तबाही

 उल्फत

8 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश की एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक ऐसी खबर दी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुरादाबाद के कटघर इलाके से हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक खूंखार आतंकी, उल्फत हुसैन, 18 साल की फरारी के बाद आखिरकार पकड़ा गया। इस आतंकी पर 25,000 रुपये का इनाम था, और यह जम्मू-कश्मीर के पूंछ जिले का निवासी है।

उल्फत ने न सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ट्रेनिंग ली थी, बल्कि वह मुरादाबाद में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में था। आखिर कौन है यह उल्फत हुसैन? उसकी कहानी क्या है, और वह इतने सालों तक कैसे छिपता रहा? इस ब्लॉग में हम इस रहस्यमयी आतंकी की जिंदगी के हर पहलू को जानेंगे।

उल्फत हुसैन का परिचय

उल्फत हुसैन, जिसे कई नामों से जाना जाता है – मोहम्मद सैफुल इस्लाम, अफजाल, परवेज, और हुसैन मलिक – जम्मू-कश्मीर के पूंछ जिले के फजलाबाद (सुरनकोट) का मूल निवासी है। उसका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उसकी जिंदगी ने जल्द ही एक खतरनाक मोड़ ले लिया। 1990 के दशक के अंत में, जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था, उल्फत ने हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठन की राह पकड़ ली। हिजबुल, जो 1989 में स्थापित हुआ था, कश्मीर को भारत से अलग करने और इस्लामिक शासन स्थापित करने के मकसद से काम करता है। उल्फत इस संगठन का सक्रिय सदस्य बन गया और उसकी जिंदगी का लक्ष्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना बन गया।

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PoK में ट्रेनिंग: आतंक की शुरुआत

1999-2000 के बीच उल्फत हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया। यहाँ उसे हथियार चलाने, विस्फोटक बनाने और आतंकी हमलों की योजना तैयार करने की कठिन ट्रेनिंग दी गई। उस दौर में PoK आतंकियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह था, जहाँ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की मदद से कई संगठन भारत के खिलाफ साजिशें रचते थे। उल्फत ने यहाँ न सिर्फ तकनीकी कौशल सीखा, बल्कि आतंक के प्रति अपनी सोच को और मजबूत किया। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह भारत लौटा, लेकिन उसका मकसद अब आम जिंदगी जीना नहीं, बल्कि तबाही मचाना था।

मुरादाबाद में पहली गिरफ्तारी: 2001 का खुलासा

उल्फत हुसैन 2001 में मुरादाबाद पहुँचा। यहाँ वह असालतपुरा की एक मस्जिद में छिपकर रहने लगा और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश में जुट गया। लेकिन उसकी योजना ज्यादा दिन तक छिपी न रह सकी। 9 जुलाई 2001 को मुरादाबाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से जो बरामद हुआ, उसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। एक AK-47, एक AK-56, दो 30 बोर पिस्टल, 12 हैंड ग्रेनेड, 39 टाइमर, 50 डेटोनेटर, 37 बैटरियाँ, 29 किलो विस्फोटक, 560 जिंदा कारतूस और 8 मैगजीन – यह हथियारों का जखीरा किसी बड़ी आतंकी वारदात की तैयारी का सबूत था।

पुलिस की पूछताछ में पता चला कि उल्फत धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले की साजिश रच रहा था। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम, और आतंकवाद निवारण अधिनियम (POTA) के तहत केस दर्ज किया गया। उसे जेल भेज दिया गया, लेकिन उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

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जमानत और फरारी: 18 साल का खेल

2001 में गिरफ्तारी के बाद उल्फत हुसैन कुछ साल जेल में रहा। 2008 में उसे जमानत मिली, लेकिन उसने कानून का फायदा उठाकर फरार होने का रास्ता चुना। जमानत पर बाहर आने के बाद वह कोर्ट में कभी पेश नहीं हुआ। मुरादाबाद की अदालत ने 7 जनवरी 2015 को उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया और उसे फरार घोषित कर दिया। इसके बाद मुरादाबाद पुलिस ने उस पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया। लेकिन उल्फत इतना चालाक था कि वह 18 साल तक पुलिस की नजरों से बचता रहा।

इस दौरान वह अलग-अलग नामों से अपनी पहचान छिपाता रहा। कभी वह मौलवी बनकर मस्जिदों में छिपा, तो कभी आम नागरिक की तरह भीड़ में घुलमिल गया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह रामपुर और बरेली के मदरसों में भी पढ़ाई के बहाने रहा और वहाँ से युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करने की कोशिश करता रहा। उसका नेटवर्क धीरे-धीरे फैल रहा था, और वह फिर से किसी बड़ी साजिश की तैयारी में था।

मुरादाबाद में दोबारा पकड़ा जाना: ATS की बड़ी कामयाबी

18 साल की लंबी फरारी के बाद, मार्च 2025 में यूपी ATS और मुरादाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने उल्फत हुसैन को फिर से मुरादाबाद के कटघर इलाके से धर दबोचा। यह गिरफ्तारी तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर हुई। ATS के मुताबिक, उल्फत एक बार फिर मुरादाबाद में आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। उसकी गिरफ्तारी से एक बड़ी तबाही टल गई। उसे कोर्ट में पेश किया गया और मेडिकल जाँच के बाद मुरादाबाद जेल भेज दिया गया।

ATS अब उसके नेटवर्क को खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक, उल्फत की तीन शादियाँ हुई थीं और उसके पाँच बच्चे हैं। उसकी पत्नियाँ और बच्चे भी जम्मू-कश्मीर में रहते हैं। यह भी संदेह है कि वह ISI के संपर्क में था और उत्तर प्रदेश में युवाओं को भर्ती करने की योजना बना रहा था।

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उल्फत की कहानी से सबक

उल्फत हुसैन की जिंदगी एक ऐसी किताब है, जो हमें आतंक के अंधेरे रास्ते की सच्चाई दिखाती है। एक साधारण युवक से खूंखार आतंकी बनने तक का उसका सफर यह बताता है कि गलत रास्ता कितना खतरनाक हो सकता है। उसकी 18 साल की फरारी और फिर गिरफ्तारी यह भी साबित करती है कि कानून के हाथ भले ही देर से पहुँचें, लेकिन वह हर अपराधी को सजा देने में सक्षम हैं।

पश्चिमी यूपी में आतंक की पनाहगाह?

उल्फत की गिरफ्तारी ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को चर्चा में ला दिया। पिछले 20 सालों में यहाँ 30 से ज्यादा आतंकी और कई पाकिस्तानी जासूस पकड़े जा चुके हैं। मुरादाबाद, सहारनपुर, रामपुर जैसे इलाके आतंकियों के लिए “सुरक्षित पनाहगाह” बनते जा रहे हैं। इसका कारण यहाँ की घनी आबादी, जटिल सामाजिक संरचना और सीमा से निकटता हो सकती है। यह एक चिंता का विषय है, जिस पर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को गंभीरता से काम करना होगा।

उल्फत हुसैन की कहानी सिर्फ एक आतंकी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह हमें आतंकवाद के खिलाफ जंग की जटिलता, सुरक्षा बलों की मेहनत और समाज की जिम्मेदारी को समझाती है। 18 साल तक फरार रहने वाला यह आतंकी आखिरकार सलाखों के पीछे है, लेकिन सवाल यह है कि क्या उसका नेटवर्क पूरी तरह खत्म हो पाएगा? क्या हम अपने युवाओं को ऐसी राह पर जाने से रोक पाएँगे? यह वक्त सोचने और कदम उठाने का है। उल्फत की गिरफ्तारी एक जीत है, लेकिन यह जंग अभी खत्म नहीं हुई। आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण समाज बनाने की कोशिश करें।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बढ़ीं मुश्किलें

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अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उच्च न्यायालय से मंगलवार को बहुत बड़ा झटका लगा है| अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और रिमांड के विरुद्ध दाखिल याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट नें खारिज कर दिया है| अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उनकी गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन नहीं है| इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल फिलहाल जेल में ही रहेंगे|

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं| पीठ नें यह भी कहा कि विशेष अदालत द्वारा केजरीवाल को रिमांड पर देना भी कानून सम्मत है| पीठ ने कहा कि यह सिर्फ केजरीवाल की गिरफ्तारी और रिमांड का मामला नहीं है, बल्कि यह आम आदमी के लिए कानूनी प्रावधान को समझने का मसला भी है| इसीलिए पीठ विस्तृत तौर पर कानूनी पक्ष को स्पष्ट कर रही है| मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से जिन आधारों पर गिरफ्तारी और रिमांड के विरोध किया गया, वह आधारहीन है|

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पीठ ने कहा कि ईडी द्वारा एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल ने साजिश रची थी| वह अपराध की आय के उपयोग को छिपाने में सक्रिय रूप से शामिल थे| ईडी की जांच से यह भी पता चलता है कि वह आम आदमी पार्टी के संयोजक के तौर पर इन सब में शामिल थे| ईडी द्वारा गिरफ्तारी कानूनी तौर पर एकदम उचित है| पीठ ने जोर दिया कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है| अदालतें संवैधानिक नैतिकता से जुड़ी होती हैं, ना कि राजनीतिक नैतिकता से| इसीलिए केजरीवाल की याचिका को खारिज किया जाता है

अरविंद केजरीवाल के चुनाव अभियान रोकने के लिए कार्यवाई

केजरीवाल के वकील ने दलील देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया, ताकि वह चुनाव का हिस्सा न बन सके|

अरविंद केजरीवाल

ईडी के पास पर्याप्त साक्ष्य

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ईडी के पास आरोपों को लेकर प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य हैं| कानून सभी के लिए एक समान रूप से लागू होता है| केजरीवाल के राजनेता होने का मतलब यह नहीं है कि एक आरोपी का नाम सामने आ जाने के बाद उसे महज इस लिए बाहर रखा जाए कि वह लोकसभा या अन्य चुनाव का हिस्सा बन सके| कानून में व्यक्ति विशेष के लिए कोई विशेषाधिकार नहीं है| यदि साक्ष्य है तो कोई भी समय हो, आरोपी की गिरफ्तारी होगी|

परेशान करना उद्देश्य

केजरीवाल की ओर से दलील दी गई कि केंद्र ने जानबूझ कर उन्हें धन संशोधन में फसाया है जबकि उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं है| सारा मकसद इस समय पर परेशान करना है|

केंद्र सरकार की भूमिका नहीं

हाईकोर्ट ने कहा यह मामला केंद्र और केजरीवाल के बीच का नहीं बल्कि अरविंद केजरीवाल और ईडी के बीच का है| इसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है| जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं|

मुख्यमंत्री केजरीवाल की दलीलें और हाईकोर्ट के जवाब

दलील: ईडी ने जानबूझकर वह समय चुना जब चुनाव सर पर है|

अदालत की टिप्पणी: गिरफ्तारी कानून के हिसाब से होगी न की चुनाव की तारीख देखकर|

दलील: सरकारी गवाहों के बयान दर्ज करने का तरीका सही नहीं था|

अदालत की टिप्पणी: हाईकोर्ट बोली की बयान दर्ज करने पर सवाल उठाना, अदालत को कलंकित करने जैसा है|

दलील: गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है|

अदालत की टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीश कानून से बंधे हैं राजनीति से नहीं|

दलील: केजरीवाल की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी हो सकती थी| ईडी जानबूझकर उन्हें अदालत में बुलाने पर डटी रही|

अदालत की टिप्पणी: आरोपी तय नहीं करेगा की जांच किस तरह की जाए, जांच आरोपी की सुविधा के मुताबिक नहीं की जा सकती है|

अरविंद केजरीवाल

गिरफ्तारी से लेकर अब तक क्या हुआ?

21 मार्च को ईडी ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को गिरफ्तार किया, और उसी दिन केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई मगर अगले दिन उसे वापस ले लिया| 22 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को ईडी की रिमांड पर भेज दिया| 23 मार्च को मुख्यमंत्री दिल्ली हाईकोर्ट गए| 1 अप्रैल को कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया| 3 अप्रैल को हाईकोर्ट ने केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई पूरी, अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा|

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