पहले शराब की बोतलें, फिर हवालात और अब रिश्वत का खेल – 6 पुलिसवाले सस्पेंड
आज के समय में जहां कानून और व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस पर होती है, वहीं कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो इस व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न केवल लोगों का ध्यान खींचा बल्कि पुलिस की कार्यशैली और ईमानदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह घटना है – “पहले शराब की बोतलों के साथ फोटो, फिर हवालात में किया बंद, अब 80,000 रुपये लेकर छोड़ा… 6 पुलिसवाले सस्पेंड”। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं और इसके पीछे छिपे कारणों व परिणामों पर नजर डालते हैं।
घटना की शुरुआत: शराब की बोतलों के साथ फोटो
यह सब तब शुरू हुआ जब कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें देखीं जिनमें कुछ पुलिसकर्मी शराब की बोतलों के साथ पोज देते नजर आए। ये तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं। आम जनता के लिए यह समझना मुश्किल था कि जो लोग कानून का पालन करवाने के लिए जिम्मेदार हैं, वे खुद ऐसी हरकतों में कैसे शामिल हो सकते हैं। इन तस्वीरों ने न केवल पुलिस की छवि को धूमिल किया बल्कि यह सवाल भी उठाया कि क्या ये पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों के प्रति वफादार हैं या नहीं।
शराब की बोतलों के साथ फोटो खिंचवाना अपने आप में एक गंभीर अपराध नहीं हो सकता, लेकिन यह उस मानसिकता को दर्शाता है जो कानून के रखवालों में नहीं होनी चाहिए। यह घटना किसी एक पुलिसकर्मी की व्यक्तिगत गलती नहीं थी, बल्कि इसमें कई लोग शामिल थे, जो इसे और भी संगीन बनाता है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया और कार्रवाई की मांग उठने लगी।
हवालात में बंद: पहला कदम
जैसे ही यह मामला पुलिस के आला अधिकारियों के संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई शुरू हुई। जिन लोगों को इन तस्वीरों में शराब की बोतलों के साथ देखा गया था, उन्हें हवालात में बंद कर दिया गया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि जनता को यह संदेश दिया जा सके कि पुलिस विभाग ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा। हवालात में बंद करना एक प्रतीकात्मक कदम था, जिसका मकसद था यह दिखाना कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी।
लेकिन यहाँ कहानी खत्म नहीं हुई। हवालात में बंद करने के बाद जो हुआ, वह इस मामले को और भी विवादास्पद बना गया। यह एक ऐसा मोड़ था जिसने पुलिस की साख को और गहरा झटका दिया।
80,000 रुपये लेकर छोड़ा: रिश्वत का खेल
हवालात में बंद किए गए लोगों को कुछ ही समय बाद रिहा कर दिया गया। लेकिन यह रिहाई मुफ्त में नहीं हुई। खबरों के मुताबिक, इन लोगों को 80,000 रुपये की रिश्वत देकर छुड़ाया गया। यह रिश्वत कथित तौर पर उन पुलिसकर्मियों को दी गई जो इस मामले को दबाने और हवालात से छोड़ने में शामिल थे। यह खुलासा होने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। जो पुलिसकर्मी पहले शराब की बोतलों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए चर्चा में थे, अब वे शराब रिश्वतखोरी के आरोप में फंस गए।
यह घटना सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती है जो भ्रष्टाचार से जूझ रहा है। 80,000 रुपये की राशि कोई छोटी रकम नहीं है, और यह सवाल उठता है कि आखिर यह पैसा कहाँ से आया और इसे किस तरह मैनेज किया गया। क्या यह रिश्वत एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी? क्या इसमें और लोग भी शामिल थे जो अभी तक सामने नहीं आए? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं।
6 पुलिसवाले सस्पेंड: सजा या दिखावा?
जब यह मामला और तूल पकड़ने लगा, तो पुलिस प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। नतीजतन, इस घटना में शामिल 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंशन एक ऐसी कार्रवाई है जो आम तौर पर गंभीर अपराधों के बाद की जाती है, और यहाँ यह कदम उठाना जरूरी भी था। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सस्पेंशन इस समस्या का समाधान है? क्या इससे भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म हो जाएंगी?
कई लोगों का मानना है कि यह सस्पेंशन सिर्फ एक दिखावा है, जिसका मकसद जनता का गुस्सा शांत करना है। सस्पेंड किए गए पुलिसकर्मियों पर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। क्या उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा या फिर कुछ समय बाद चुपचाप बहाल कर लिया जाएगा? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, और हर बार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती नजर आई है।
समाज और पुलिस पर प्रभाव
इस शराब घटना का असर सिर्फ उन 6 पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं है। यह पूरे पुलिस विभाग की छवि पर एक धब्बा है। आम जनता का पुलिस पर भरोसा पहले से ही कम होता जा रहा है, और ऐसी घटनाएं इस भरोसे को और कमजोर करती हैं। लोग अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि अगर कानून के रखवाले ही भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे, तो समाज की सुरक्षा कौन करेगा?
इसके अलावा, यह घटना पुलिसकर्मियों के काम करने की परिस्थितियों और उनकी मानसिकता पर भी सवाल उठाती है। क्या उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन मिलते हैं? क्या उनकी सैलरी और सुविधाएं ऐसी हैं कि वे रिश्वत लेने के लिए मजबूर न हों? इन सवालों के जवाब ढूंढना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
सुधार की जरूरत
“पहले शराब की बोतलों के साथ फोटो, फिर हवालात में किया बंद, अब 80,000 रुपये लेकर छोड़ा… 6 पुलिसवाले सस्पेंड” – यह सिर्फ एक सुर्खी नहीं है, बल्कि एक गंभीर समस्या का प्रतीक है। यह शराब घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि पुलिस व्यवस्था में सुधार की कितनी जरूरत है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सिर्फ सस्पेंशन या सजा काफी नहीं है। इसके लिए एक मजबूत और पारदर्शी सिस्टम बनाना होगा, जिसमें पुलिसकर्मियों को न केवल सजा बल्कि बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं भी मिलें।
आखिर में, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम ऐसी घटनाओं पर नजर रखें और अपने स्तर पर बदलाव की मांग करें। क्योंकि अगर कानून के रखवाले ही कानून तोड़ेंगे, तो समाज का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। क्या आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहेंगे? यह सवाल हर नागरिक से है।
संजय सिंह सुसाइड केस: टारगेट के दबाव में टूटा एक अफसर, 800 ने छोड़ा व्हाट्सएप कमांड
हाल ही में नोएडा में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) डिप्टी कमिश्नर संजय सिंह की आत्महत्या ने न केवल उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में हड़कंप मचा दिया, बल्कि पूरे देश में सरकारी नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए। इस घटना के बाद लगभग 800 जीएसटी अधिकारियों ने स्टेट टैक्स के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया, जो विभागीय निर्देशों और कमांड का प्रमुख माध्यम था।
यह कदम न सिर्फ एक सामूहिक विरोध का प्रतीक बन गया, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी अधिकारियों पर कार्यभार और मानसिक दबाव कितना गंभीर रूप ले चुका है। इस ब्लॉग में हम इस मामले के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे, इसके कारणों, प्रभावों और संभावित समाधानों पर चर्चा करेंगे।
संजय सिंह सुसाइड केस: घटना का पूरा ब्यौरा
संजय सिंह नोएडा में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थे। उनकी आत्महत्या की खबर ने विभाग को झकझोर कर रख दिया। प्रारंभिक जांच और परिवार के बयानों के अनुसार, संजय सिंह पिछले कई महीनों से अत्यधिक तनाव में थे। उनकी पत्नी ने बताया कि वह अक्सर घर पर अपने काम के दबाव की शिकायत करते थे। टैक्स कलेक्शन के असंभव लक्ष्य, उच्च अधिकारियों की लगातार निगरानी और जवाबदेही का बोझ उनके लिए असहनीय हो गया था। एक दिन, संजय सिंह ने अपने घर में यह कठोर कदम उठा लिया, जिसने न केवल उनके परिवार को सदमे में डाल दिया, बल्कि उनके सहकर्मियों में भी गहरी नाराजगी पैदा कर दी।
पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की और संजय सिंह के मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की। उनके फोन में स्टेट टैक्स व्हाट्सएप ग्रुप के मैसेजेस मिले, जिनमें टारगेट्स को लेकर सख्त निर्देश और लगातार अपडेट्स की मांग की गई थी। यह साफ हो गया कि संजय सिंह की आत्महत्या का कारण व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पेशेवर दबाव था। यह घटना मार्च 2025 के पहले सप्ताह में हुई, और इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया।
800 अफसरों का सामूहिक विरोध: व्हाट्सएप ग्रुप का बहिष्कार
संजय सिंह की आत्महत्या के बाद जीएसटी विभाग में असंतोष की लहर फैल गई। अधिकारियों ने इस घटना को अपने ऊपर हो रहे अन्याय का प्रतीक माना। इसके जवाब में, उत्तर प्रदेश के लगभग 800 जीएसटी अधिकारियों ने स्टेट टैक्स के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया। यह ग्रुप विभागीय संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसमें रोजाना टैक्स कलेक्शन के आंकड़े, नए टारगेट्स, और उच्च अधिकारियों के निर्देश साझा किए जाते थे। कई बार रात में भी मैसेजेस आते थे, जिससे अधिकारियों को लगातार काम के दबाव में रहना पड़ता था।
जीएसटी ऑफीसर सर्विस एसोसिएशन ने इस मामले में तुरंत कदम उठाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्योति स्वरूप शुक्ला और महासचिव अरुण सिंह ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सैकड़ों अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह तय हुआ कि कोई भी अधिकारी अब इस ग्रुप का हिस्सा नहीं रहेगा। इसके साथ ही, अधिकारियों ने काला फीता बांधकर काम करने का फैसला लिया, जो उनके शांतिपूर्ण विरोध का एक तरीका था। इस कदम का मकसद सरकार और विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था।
विभाग में दबाव का माहौल: टारगेट्स का बोझ
जीएसटी विभाग में काम करने वाले अधिकारियों के लिए टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य पिछले कुछ सालों में एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। केंद्र और राज्य सरकारें जीएसटी को राजस्व का प्रमुख स्रोत मानती हैं। हर साल बजट में टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य बढ़ाए जाते हैं, और इन लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी अधिकारियों पर डाल दी जाती है। लेकिन कई बार ये लक्ष्य इतने अव्यावहारिक होते हैं कि इन्हें हासिल करना असंभव सा लगता है। उदाहरण के लिए, छोटे और मझोले व्यापारियों से टैक्स वसूलना आसान नहीं होता, क्योंकि उनके पास संसाधन सीमित होते हैं। फिर भी, अधिकारियों पर दबाव डाला जाता है कि वे किसी भी तरह टारगेट पूरा करें।
इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन ग्रुप्स में हर दिन प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी जाती है, और अगर कोई अधिकारी टारगेट से पीछे रहता है, तो उसे सार्वजनिक रूप से जवाब देना पड़ता है। संजय सिंह के मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ। उनके सहकर्मियों का कहना है कि वह एक मेहनती और ईमानदार अधिकारी थे, लेकिन लगातार दबाव और अपमान ने उन्हें तोड़ दिया। यह स्थिति सिर्फ संजय सिंह तक सीमित नहीं है; कई अन्य अधिकारी भी इसी तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर: एक अनदेखी सच्चाई
संजय सिंह की आत्महत्या ने एक बड़े मुद्दे को उजागर किया है – सरकारी नौकरियों में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी। भारत में सरकारी नौकरी को सम्मान और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसके पीछे की हकीकत कई बार कड़वी होती है। जीएसटी जैसे विभागों में अधिकारियों को न केवल टारगेट्स का बोझ उठाना पड़ता है, बल्कि जनता के गुस्से और शिकायतों का भी सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, उच्च अधिकारियों की सख्ती और नौकरशाही की जटिलताएं उनके लिए काम को और मुश्किल बना देती हैं।
संजय सिंह की पत्नी ने बताया कि वह अक्सर रात में नींद नहीं ले पाते थे। उन्हें डर रहता था कि अगले दिन की रिपोर्ट में अगर आंकड़े कम हुए, तो उनकी आलोचना होगी। यह तनाव उनके निजी जीवन में भी घुस गया था। वह अपने बच्चों और परिवार के साथ समय नहीं बिता पाते थे। यह कहानी सिर्फ संजय सिंह की नहीं, बल्कि उन तमाम अधिकारियों की है जो इसी तरह के हालात से गुजर रहे हैं।
अधिकारियों की मांगें: क्या है उनका पक्ष?
800 अधिकारियों का व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ना और काला फीता बांधना महज एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं है। इसके पीछे उनकी कुछ ठोस मांगें हैं। पहली मांग है कि टैक्स कलेक्शन के टारगेट्स को तर्कसंगत बनाया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा लक्ष्य जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। दूसरी मांग है कि अधिकारियों की मानसिक सेहत पर ध्यान दिया जाए। इसके लिए काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम की व्यवस्था की जानी चाहिए। तीसरी मांग है कि व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों की जगह औपचारिक संचार प्रणाली अपनाई जाए, ताकि अधिकारियों को हर समय निगरानी का अहसास न हो।
जीएसटी ऑफीसर सर्विस एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे हड़ताल जैसे बड़े कदम उठा सकते हैं। उनका कहना है कि संजय सिंह की मौत एक चेतावनी है, और इसे नजरअंदाज करना भविष्य में और नुकसानदायक हो सकता है।
सरकार के सामने चुनौती और समाधान
यह घटना सरकार के लिए एक सबक है। राजस्व बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों की सेहत को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। सरकार को चाहिए कि वह जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करे। टारगेट्स को निर्धारित करने से पहले जमीनी स्तर पर अध्ययन किया जाए। इसके साथ ही, अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम और मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम शुरू किए जाएं। व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक टूल्स की जगह एक प्रोफेशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जिसमें काम के घंटों का ध्यान रखा जाए।
समाज का दायित्व
यह मामला सिर्फ सरकार और अधिकारियों तक सीमित नहीं है। समाज के तौर पर हमें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। हमें यह स्वीकार करना होगा कि हर नौकरी में एक इंसान काम करता है, जिसकी अपनी भावनाएं और सीमाएं होती हैं। संजय सिंह जैसे लोगों के लिए परिवार और दोस्तों का सपोर्ट बेहद जरूरी होता है। हमें अपने आसपास के लोगों की मानसिक स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करनी चाहिए।
GST डिप्टी कमिश्नर संजय सिंह की आत्महत्या और इसके बाद 800 अधिकारियों द्वारा स्टेट टैक्स व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ना एक गंभीर संकेत है। यह घटना हमें बताती है कि कार्यस्थल का दबाव कितना खतरनाक हो सकता है। आज 15 मार्च 2025 है, और यह मामला अभी भी गर्म है। उम्मीद है कि सरकार और विभाग इस घटना से सबक लेंगे और अधिकारियों के हित में ठोस कदम उठाएंगे। संजय सिंह की मौत एक त्रासदी है, लेकिन अगर इससे सकारात्मक बदलाव आते हैं, तो उनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। यह समय है कि हम सब मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाएं, जहां काम और जीवन के बीच संतुलन हो, और हर इंसान की कीमत समझी जाए।
1984 सिख दंगे: सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सज़ा – एक लंबी न्यायिक लड़ाई का परिणाम
31 अक्टूबर 1984 को भारत ने एक ऐसी घटना देखी जिसने इसके सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों – बेअंत सिंह और सतवंत सिंह – द्वारा हत्या कर दी गई। यह हत्या ऑपरेशन ब्लू स्टार का प्रत्यक्ष परिणाम थी, जिसे सिख समुदाय ने अपने पवित्र स्वर्ण मंदिर पर हमले के रूप में देखा। लेकिन इस हत्या के बाद जो हुआ, वह एक अनियंत्रित हिंसा का तांडव था, जिसे इतिहास “1984 सिख दंगे” के नाम से जानता है।
इस हिंसा में हजारों सिख मारे गए, उनके घर और व्यवसाय नष्ट हो गए, और एक पूरा समुदाय दहशत में डूब गया। इस त्रासदी में सज्जन कुमार जैसे राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद, दिसंबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह लेख उस घटना की पृष्ठभूमि, सज्जन कुमार के मामले और इसके व्यापक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालता है।
दंगों की पृष्ठभूमि और शुरुआत
1984 के सिख दंगों को समझने के लिए हमें ऑपरेशन ब्लू स्टार के संदर्भ में जाना होगा। जून 1984 में, इंदिरा गांधी की सरकार ने पंजाब में बढ़ते सिख उग्रवाद को कुचलने के लिए स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। इस ऑपरेशन में जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों को मार गिराया गया, लेकिन इसने सिख समुदाय के बीच गहरा आक्रोश पैदा किया। मंदिर को नुकसान और सैकड़ों नागरिकों की मौत ने सिखों में यह भावना जगा दी कि उनकी धार्मिक पहचान पर हमला हुआ है। इंदिरा गांधी की हत्या को इसी संदर्भ में देखा गया – यह एक बदले की कार्रवाई थी।
हालांकि, हत्या के बाद जो हिंसा भड़की, वह सहज नहीं थी। 1 नवंबर 1984 से शुरू हुए दंगों में दिल्ली के त्रिलोकपुरी, सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी और पालम जैसे इलाकों में सिखों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया। भीड़ ने सिख पुरुषों को उनके घरों से खींचकर जिंदा जलाया, बच्चों और महिलाओं पर हमले किए, और उनकी संपत्तियों को लूटकर आग के हवाले कर दिया।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में 2,733 सिख मारे गए, लेकिन स्वतंत्र अनुमानों के अनुसार यह संख्या 3,000 से 8,000 तक हो सकती है। देश के अन्य हिस्सों जैसे कानपुर, बोकारो और चास में भी सैकड़ों लोग मारे गए। कई पीड़ितों और मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया कि यह हिंसा सुनियोजित थी, जिसमें स्थानीय नेताओं और पुलिस की मिलीभगत थी। मतदाता सूचियों का उपयोग करके सिख घरों की पहचान की गई, और हमलावरों को हथियार, पेट्रोल और केरोसिन जैसी सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं।
सज्जन कुमार का उदय और विवाद
सज्जन कुमार उस समय कांग्रेस पार्टी के एक उभरते हुए नेता थे। दिल्ली के बाहरी इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ थी, और वे 1980 में मंगोलपुरी से लोकसभा सांसद चुने गए थे। उनकी छवि एक प्रभावशाली और जन-समर्थित नेता की थी, जो अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए जाने जाते थे। लेकिन 1984 के दंगों ने उनकी इस छवि को धूमिल कर दिया।
कई प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि सज्जन कुमार ने हिंसा को संगठित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। सुल्तानपुरी में एक गवाह, निर्मल कौर, ने दावा किया कि उन्होंने सज्जन कुमार को भीड़ को संबोधित करते हुए सुना, जिसमें उन्होंने कहा, “एक भी सिख को जिंदा नहीं छोड़ना है।” इसी तरह, पालम के राज नगर इलाके में हुई हत्याओं में उनकी संलिप्तता के सबूत सामने आए।
1 नवंबर 1984 को पालम में पांच सिखों – केवल सिंह, गुरप्रीत सिंह, नरेंद्र पाल सिंह, रघुविंदर सिंह और कुलदीप सिंह – को भीड़ ने घेरकर मार डाला। गवाहों ने बताया कि सज्जन कुमार घटनास्थल पर मौजूद थे और उन्होंने भीड़ को उकसाया। एक अन्य गवाह, शीला कौर, ने कहा कि सज्जन कुमार ने हमलावरों को यह कहकर प्रोत्साहित किया कि “सिखों ने हमारी मां को मारा है, अब हमें बदला लेना है।” इन आरोपों ने उनके खिलाफ जांच की मांग को तेज कर दिया।
लंबी कानूनी लड़ाई और देरी
1984 के दंगों के बाद सरकार ने कई जांच आयोग गठित किए, जैसे मारीचंद कमेटी (1984), जैन-बनर्जी कमेटी (1987), और नानावटी आयोग (2000)। इनमें से कई ने सज्जन कुमार और अन्य कांग्रेस नेताओं जैसे एच.के.एल. भगत और जगदीश टाइटलर के खिलाफ सबूत पाए। नानावटी आयोग ने 2005 में अपनी रिपोर्ट में सज्जन कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनके खिलाफ पहला मामला 1987 में दर्ज हुआ, लेकिन गवाहों के डरने, सबूतों के नष्ट होने और राजनीतिक दबाव के कारण वे बार-बार बचते रहे।
2005 में, जब नानावटी आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश हुई, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीड़ितों से माफी मांगी और कार्रवाई का वादा किया। इसके बाद CBI को जांच सौंपी गई। 2013 में दिल्ली की एक निचली अदालत ने सज्जन कुमार को पालम हत्याकांड में बरी कर दिया, जिससे पीड़ित परिवारों में निराशा छा गई। लेकिन CBI ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
कई सालों की सुनवाई, गवाहों के बयान और सबूतों की पड़ताल के बाद, 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि गवाहों के बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फैसले का महत्व और टिप्पणियां
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने अपने 207 पेज के फैसले में कहा कि 1984 के दंगे “मानवता के खिलाफ अपराध” थे। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि यह हिंसा सुनियोजित थी और इसमें राजनीतिक संरक्षण था। सज्जन कुमार को हत्या, दंगा भड़काने, आगजनी और साजिश रचने का दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के अपराधों में देरी से मिला न्याय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का संदेश देता है।
फैसले के बाद सज्जन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उन्होंने अपनी उम्र (70 से अधिक) और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन 2019 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला सबूतों पर आधारित है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। आज वे तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
यह फैसला पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत था। 34 साल बाद मिले इस न्याय ने उनके जख्मों पर मरहम लगाया। कई पीड़ितों, जैसे जगदीश कौर, जिन्होंने अपने पति और बेटे को खोया था, ने इसे “अंधेरे में एक रोशनी” बताया। लेकिन यह भी सच है कि यह केवल एक शुरुआत है। दंगों में शामिल कई अन्य प्रभावशाली लोग अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पूर्ण न्याय तभी मिलेगा जब सभी दोषियों को सजा मिलेगी और पीड़ितों को मुआवजा व पुनर्वास मिलेगा।
राजनीतिक रूप से, यह फैसला कांग्रेस के लिए एक झटका था। 1984 के दंगे हमेशा से उनके लिए एक विवादास्पद मुद्दा रहे हैं। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल, ने इसे कांग्रेस की विफलता के रूप में पेश किया। इसने यह सवाल भी उठाया कि क्या उस समय की सरकार और पुलिस ने जानबूझकर निष्क्रियता दिखाई।
1984 के सिख दंगे भारत के इतिहास में एक दुखद और शर्मनाक घटना हैं। सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा इस दिशा में एक कदम है कि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए। लेकिन यह यात्रा अभी अधूरी है। यह घटना हमें सिखाती है कि सांप्रदायिक हिंसा और नफरत का जवाब सिर्फ न्याय, जवाबदेही और आपसी भाईचारे से दिया जा सकता है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसी त्रासदियों को दोबारा न होने दें।
ऑनलाइन इश्क पड़ गई भारी: 4 करोड़ गंवाकर बेघर हुई महिला, दो बार बनी स्कैम का शिकार
आज के डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने लोगों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर भी बन गया है। ऑस्ट्रेलिया में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां ऑनलाइन सच्चा प्यार पाने के चक्कर में एक महिला ने अपनी पूरी जमापूंजी गंवा दी। 57 वर्षीय एनेट फोर्ड एक नहीं, बल्कि दो बार ऑनलाइन रोमांस स्कैम का शिकार हुईं और कुल मिलाकर 7,80,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (4.3 करोड़ रुपये से अधिक) गंवा बैठीं।
कैसे फंसी महिला ठगों के जाल में?
एनेट फोर्ड की शादी को 33 साल हो चुके थे, लेकिन जब उनका रिश्ता टूटा, तो वे मानसिक रूप से काफी टूट गईं। भावनात्मक सहारे की तलाश में उन्होंने ऑनलाइन डेटिंग का सहारा लिया। इस दौरान उनकी मुलाकात ऑनलाइन पर विलियम नाम के एक व्यक्ति से हुई, जो उनके साथ रोज बातें करता और उनकी भावनाओं को समझने का दिखावा करता।
कुछ समय बाद, ऑनलाइन पर विलियम ने एनेट को बताया कि कुआलालंपुर में एक झगड़े के दौरान उसका पर्स चोरी हो गया है और उसे तत्काल 5,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 2.75 लाख रुपये) की जरूरत है। एनेट, जो पहले से ही मानसिक रूप से कमजोर थीं, भावनाओं में बहकर तुरंत पैसे भेज देती हैं।
एक के बाद एक झूठ, और बढ़ता लालच
ऑनलाइन पर विलियम को जब पहली बार पैसे मिल गए, तो वह और ज्यादा आत्मविश्वास में आ गया। इसके बाद उसने एनेट को बताया कि वह अस्पताल में भर्ती है और उसे डॉक्टर की फीस भरनी है। बिना किसी जांच-पड़ताल के एनेट ने फिर पैसे भेज दिए।
यहीं से ठगों की असली चाल शुरू हुई।
इसके बाद कभी अस्पताल का बिल, कभी होटल में रहने का खर्च, तो कभी बैंक कार्ड्स के काम न करने का बहाना बनाकर विलियम ने एनेट से लगातार पैसे ऐंठे। जब एनेट को शक हुआ और उन्होंने सवाल किए, तो स्कैमर ने फिर से भावनात्मक ब्लैकमेल किया और वह दोबारा उसके जाल में फंस गईं।
डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह विलियम ने एनेट से 3 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 1.65 करोड़ रुपये) ठग लिए।
थाने में शिकायत दर्ज, लेकिन कोई फायदा नहीं
जब एनेट को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो गई हैं, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन उन्हें वहां से कोई मदद नहीं मिली। साइबर ठगों की पहचान और पकड़ पाना पुलिस के लिए मुश्किल साबित हुआ।
फिर दोबारा हुई स्कैम का शिकार
2022 में, फेसबुक पर एनेट की दोस्ती नेल्सन नाम के एक शख्स से हुई। वह भी पहले की तरह बेहद समझदार, सहानुभूतिपूर्ण और आकर्षक व्यक्तित्व का था। इस बार भी उन्होंने भरोसा किया और वही कहानी दोबारा शुरू हो गई।
नेल्सन ने भी अलग-अलग बहानों से एनेट से पैसे ऐंठने शुरू कर दिए और इस बार कुल 280,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 1.54 करोड़ रुपये) हड़प लिए। इस तरह, दो अलग-अलग साइबर अपराधियों ने एनेट की पूरी संपत्ति लूट ली, और अंततः वह बेघर हो गईं।
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते रोमांस स्कैम के आंकड़े
ऑनलाइन पर ऑस्ट्रेलिया में रोमांस स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। 2023 में देशभर में 3,200 से अधिक ऐसे मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुल मिलाकर 130 करोड़ रुपये (लगभग 24 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) की धोखाधड़ी हुई। उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों का कहना है कि अब साइबर अपराधी एआई संचालित डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ये स्कैम और भी ज्यादा विश्वसनीय लगने लगे हैं।
ऑनलाइन रोमांस स्कैम से बचने के उपाय
ऑनलाइन रोमांस स्कैम से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। यहां कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं:
अनजान लोगों पर जल्दी भरोसा न करें – अगर कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से आपको कमजोर कर रहा है और जल्दी ही पैसों की मांग कर रहा है, तो सतर्क रहें।
वीडियो कॉल करें – अगर कोई व्यक्ति बार-बार मिलने या वीडियो कॉल करने से बच रहा है, तो यह एक रेड फ्लैग हो सकता है।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें – किसी को भी अपनी वित्तीय स्थिति या बैंकिंग डिटेल्स न बताएं।
फोटो और प्रोफाइल की जांच करें – गूगल रिवर्स इमेज सर्च का उपयोग करके यह जांचें कि सामने वाला व्यक्ति असली है या नहीं।
किसी भी भुगतान से पहले जांच करें – अगर कोई आपसे पैसे मांग रहा है, तो पहले उसके बारे में पूरी जांच-पड़ताल करें।
दोस्तों और परिवार से सलाह लें – रोमांस स्कैम में फंसने वाले लोग अक्सर अकेले निर्णय लेते हैं। किसी भी संदेह की स्थिति में अपने करीबियों से सलाह जरूर लें।
पुलिस और साइबर सेल को रिपोर्ट करें – अगर आपको संदेह है कि आप ठगी के शिकार हो रहे हैं, तो तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।
ऑनलाइन रोमांस स्कैम एक खतरनाक साइबर अपराध बन चुका है, जिसमें अपराधी लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें ठगते हैं। एनेट फोर्ड जैसी घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि इंटरनेट पर सतर्क रहना कितना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति पर जल्दी भरोसा न करें और अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखें।
अगर आपको भी किसी तरह का संदेह होता है, तो तुरंत साइबर क्राइम विभाग में रिपोर्ट करें।
MPPSC PCS 2022 Topper: Father drives an auto, daughter Ayesha Ansari passed the PCS exam without coaching, became SDM
MPPSC PCS 2022 Topper: Ayesha Ansari has secured 12th rank in MP State Service, PCS 2022. She has been selected for the post of SDM. Her father is an auto-driver. In the absence of facilities, she prepared and achieved success.
The final result of MP State Service, PCS 2022 was declared by the Madhya Pradesh Public Service Commission. Along with this, the commission also released the topper list. The results were declared on 18 January. The topper also includes 6 girls who have been selected for the post of SDM. One of them is Ayesha Ansari of Rewa. She passed the exam without coaching and became SDM by securing 12th rank in the state. Let us know the story of her struggle.
Ayesha is a resident of Amhiya Mohalla of Rewa. Earlier, she had taken the PCS exam twice but did not succeed. In the third attempt, she passed the MP State Service Examination with 12th rank and was selected for the post of SDM.
Ayesha’s father drives an auto, and the family survives on that. Due to the poor financial condition of the house, instead of going to expensive coaching, Ayesha prepared for the State Service Examination on her own and achieved this success. She studied in the absence of facilities and set an example of success.
Ayesha Ansari Profile: Started preparation after graduation
Initial studies were completed by the government at of Praveen Kumari Higher Secondary School. After that, she graduated and then started preparing for the PCS examination. Her parents inspired her to prepare for the State Service Examination. In an interview, she said that her parents did not get the opportunity to study much, but they wanted us to study and move forward.
Ayesha Ansari: Father inspired her; daughter became SDM
According to media reports, Ayesha’s mother said that she never asked for anything, and her father always motivated her to study. She was always alert towards her studies and used to prepare without wasting time. Ayesha’s mother said that she has achieved this success by working hard.
सरकारी जमीन पर वक्फ का कब्जा: रामपुर में 396 हेक्टेयर जमीन की बड़ी हेराफेरी
परिचय
भारत में जमीन के विवाद पुरानी कहानी है। चाहे वह विवादित जमीन के दावे हों या वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन के कब्जे का मामला, ऐसी घटनाएँ अक्सर सार्वजनिक आक्रोश और राजनीतिक तनाव का कारण बनती हैं। रामपुर में 396 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर वक्फ का कब्जा करने का आरोप, जिसे कई लोग “बड़ी हेराफेरी” के रूप में देखते हैं, इसी प्रकार की एक गंभीर घटना है। इस लेख में हम न केवल इस मामले की बारीकियों को उजागर करेंगे, बल्कि यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि कैसे जमीन के रिकॉर्ड, कानून की कमजोरियाँ, और राजनीतिक दबाव मिलकर इस प्रकार की घटनाओं को जन्म देते हैं।
वक्फ और सरकारी जमीन: ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य
वक्फ की परंपरा
वक्फ का इतिहास मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में गहराई से रचा-बसा है। पारंपरिक रूप से, वक्फ किसी धार्मिक, शैक्षिक या कलात्मक उद्देश्य के लिए दान की गई संपत्ति होती है। हालांकि, समय के साथ यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और गैरकानूनी कब्जे का भी शिकार हो गई है। वक्फ बोर्ड का कार्य होता है – दान की गई संपत्ति का संरक्षण और उसका उचित प्रबंधन करना—लेकिन कमजोर प्रशासन और राजनीतिक दबाव ने इस प्रणाली को जटिल बना दिया है।
सरकारी जमीन का महत्व
सरकारी जमीन, विशेषकर महानगरों और ऐतिहासिक क्षेत्रों में, सामरिक और आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। रामपुर क्षेत्र में मौजूद ये 396 हेक्टेयर जमीन न केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। जब इस तरह की जमीन का गलत तरीके से कब्जा किया जाता है, तो न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि स्थानीय समुदाय के विश्वास पर भी आंच आती है।
रामपुर में मामला: आरोप और विवाद
घटनाक्रम की रूपरेखा
रामपुर में हाल ही में उठे आरोपों के अनुसार, सरकारी जमीन पर वक्फ का दावा करते हुए 396 हेक्टेयर क्षेत्र का कब्जा किया गया है। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इस जमीन का रिकॉर्ड में हस्तक्षेप हुआ और उसे अवैध रूप से वक्फ के तहत रजिस्टर कर दिया गया। कई स्रोतों का कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद त्वरित और संदिग्ध रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इस प्रक्रिया में कोई कानून उल्लंघन हुआ है।
आरोपों के मुख्य बिंदु
अवैध रजिस्ट्रेशन: सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का स्वामित्व बदलते ही आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसे बिना उचित जांच-पड़ताल के वक्फ के तहत दर्ज किया गया।
दस्तावेजी कमजोरियाँ: जमीन के रिकॉर्ड में दस्तावेजों की सत्यता को लेकर कई संशय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेजी जालसाजी और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
राजनीतिक दबाव: कुछ रिपोर्टों के अनुसार, राजनीतिक हितों के कारण इस मामले में दबाव बनाया गया ताकि जमीन के कब्जे से जुड़े फायदे का लाभ उठाया जा सके। यह आरोप न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीतिक दल किस तरह जमीन के विवादों का उपयोग चुनावी लाभ के लिए कर सकते हैं।
कानूनी परिप्रेक्ष्य
वर्तमान कानून के अनुसार, सरकारी जमीन का स्वामित्व परिवर्तन एक कठोर प्रक्रिया से गुजरता है। यदि कोई जमीन अवैध तरीके से वक्फ के तहत दर्ज की जाती है, तो यह एक आपराधिक अपराध माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में जांच की आवश्यकता है कि क्या जमीन के रिकॉर्ड में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है या यह किसी प्रशासनिक चूक का परिणाम है।
वकीलों का मानना है कि यदि इस मामले में भ्रष्टाचार सिद्ध होता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा, प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जा सके।
सामाजिक और राजनीतिक आयाम
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
रामपुर के स्थानीय निवासियों में इस मामले को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिला है। कई नागरिकों का कहना है कि यह जमीन उनके क्षेत्रीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका अवैध कब्जा होने से न केवल विकास परियोजनाएँ प्रभावित होंगी, बल्कि सामाजिक अन्याय का भी सामना करना पड़ेगा। स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले पर कड़ी निंदा की है और मांग की है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे।
राजनीतिक दलों की भूमिका
राजनीतिक दलों ने भी इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की भ्रष्टाचार की एक और मिसाल बताते हुए, इस मामले की गहराई से जांच की मांग की है। वहीं, कुछ समर्थक यह दावा करते हैं कि यह मामला राजनीतिक एजेंडा बनाने के लिए बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है। इस संदर्भ में, यह स्पष्ट है कि राजनीतिक हित भी इस विवाद में गहराई तक जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी, प्रशासनिक और समाजशास्त्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं होगा, बल्कि इसकी जड़ में छिपी प्रशासनिक कमजोरियों और राजनीतिक दबावों को भी समझना होगा। डॉ. अनिल शर्मा, एक प्रख्यात प्रशासनिक सुधार विशेषज्ञ कहते हैं, “जब सरकारी जमीन जैसे संवेदनशील मुद्दों में पारदर्शिता की कमी होती है, तो ऐसे मामलों में जनता का विश्वास तुरंत टूट जाता है। इसे सुधारने के लिए हमें न केवल दोषियों को सजा देनी होगी, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी पुनर्गठित करना होगा।”
दस्तावेजी प्रमाण और आंकड़ों का विश्लेषण
इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजी प्रमाणों और रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, कई रिपोर्टों के अनुसार, जमीन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों में असंगतियाँ पाई गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इन दस्तावेजों में छेड़छाड़ हुई है, तो यह न केवल प्रशासनिक त्रुटि है, बल्कि यह जानबूझकर की गई हेराफेरी भी हो सकती है।
कुछ आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में इसी प्रकार की घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जहाँ सरकारी जमीन का गलत तरीके से कब्जा कर उसे निजी या वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया। हालांकि, 396 हेक्टेयर के मामले को अब तक सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है, जिससे यह मामला और भी चिंताजनक हो जाता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगामी कदम
इस मामले में प्रशासनिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, संबंधित विभागों द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या दस्तावेजी जालसाजी पाई जाती है, तो कड़ी सजा दी जाएगी। इसके अलावा, प्रशासनिक प्रक्रिया में सुधार के लिए नई नीतियाँ और निगरानी तंत्र भी लागू किए जाने की उम्मीद है।
संभावित सुधारात्मक कदम
पारदर्शिता में वृद्धि: जमीन के रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। डिजिटल रिकॉर्डिंग और नियमित ऑडिट सिस्टम से इस तरह के मामलों को रोका जा सकता है।
कानूनी कार्रवाई में तत्परता: दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की हेराफेरी को अवसर न मिले।
सार्वजनिक जागरूकता: स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि वे अपनी संपत्ति के अधिकारों के प्रति सजग रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दे सकें।
स्वतंत्र जांच आयोग: एक स्वतंत्र जांच आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जो इस मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कर सके।
निष्कर्ष
रामपुर में सरकारी जमीन पर वक्फ का कब्जा और 396 हेक्टेयर जमीन की बड़ी हेराफेरी का मामला केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं है, बल्कि यह एक गहरी और जटिल समस्या का प्रतीक है। यह मामला प्रशासनिक कमजोरियों, भ्रष्टाचार, और राजनीतिक दबावों के मिश्रण को दर्शाता है, जिससे स्थानीय विकास और सामाजिक न्याय पर गहरा प्रश्नचिन्ह लग जाता है।
इस विवादास्पद मामले में, पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़ी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। दोषियों को सख्त सजा देकर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार कर ही इस प्रकार की हेराफेरी को रोका जा सकता है। साथ ही, राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों को मिलकर इस मामले पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि जब सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग होता है, तो न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि समाज के कमजोर वर्गों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। रामपुर का यह मामला हमें याद दिलाता है कि न्याय और पारदर्शिता ही एक स्वस्थ लोकतंत्र का आधार हैं। यदि प्रशासन और सरकार समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाती, तो ऐसे मामले भविष्य में और बढ़ सकते हैं, जिससे सामाजिक असंतुलन और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जाएँगी।
अंत में, यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए कि सरकारी संपत्ति और धार्मिक वक्फ व्यवस्था दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इनके बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान, पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और जागरूक नागरिक समाज की भूमिका अपरिहार्य है। केवल तभी हम एक न्यायपूर्ण और विकसित समाज की कल्पना कर सकते हैं, जहाँ सरकारी जमीन का दुरुपयोग न होकर समाज के विकास और समृद्धि में सहायक हो।
Today’s latest news – Waqf Amendment Bill: JPC may submit a report to the Lok Sabha Speaker on 27th or 28th January
UP CM Yogi Adityanath enters Delhi Assembly Elections. In his public meeting held at Kiradi, CM Yogi attacked Arvind Kejriwal’s government with heavy guns. Niranjani Akhara met up today to decide on the Sanatan Board. Get all the latest breaking news concerning the country and the world by frequently refreshing this page.
JPC is likely to submit a report on the 27th or 28th of January
According to sources, the JPC constituted on the Waqf Amendment Bill may submit its report to the Lok Sabha Speaker on the 27th or 28th of January. Once cleared by the Speaker, the report will be tabled in the Lok Sabha during the budget session soon.
Jalgaon rail accident: 4 citizens of Nepal killed
Four of the persons who lost their lives in the train accident at Jalgaon in Maharashtra on Wednesday are from Nepal. Officials say that 13 people have been killed in this accident. 15 have been injured.
Bus catches fire in Bilaspur
One HRTC bus on its way from Shimla to Kangra in Himachal Pradesh caught fire near Kandaur in Bilaspur on Thursday. The driver stopped the bus the moment smoke emanated out of the engine. All the passengers came out, saving them from the major accident.
Big action by Gujarat State Road Transport Corporation
The Gujarat State Road Transport Corporation has taken big action against the hotels being run by Muslims under the guise of Hindu names. The department has de-listed all such hotels. Now the state transport buses will not halt at these hotels. The licenses of all these have been cancelled by GSRTC.
This government worked to settle Bangladeshi-Rohingyas
In the Delhi rally, CM Yogi Adityanath severely attacked Arvind Kejriwal and his party’s government. CM Yogi said, that today people are looking at UP as a model. Aam Aadmi Party has deprived the people of Delhi of facilities under a well-planned conspiracy. CM Yogi raised the issue of Bangladeshis and Rohingyas. Said that this government has worked to settle Bangladeshis and Rohingyas. Aam Aadmi Party leaders distribute Aadhar cards.
Can Kejriwal and his ministers take a bath in Yamuna?
CM Yogi has joined the political fray of Delhi. On Thursday, he addressed an open meeting at Kiradi. CM Yogi said, if as a CM, I and the ministers of my government can take a bath in Sangam, then can Kejriwal and his ministers take a bath in Yamuna?
CM Yogi will address the open meeting shortly.
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath will address three public meetings in Delhi today. He has reached Kirori. He will address the public meeting soon.
An Agniveer soldier, Lovepreet Singh, was martyred in a terrorist attack in Kupwara, Jammu and Kashmir. Punjab CM Bhagwant Mann posted, 24-year-old Agniveer soldier Lovepreet Singh of village Akaliya in Mansa was martyred in the firing by terrorists. I express my heartfelt condolences to the family. Salute to the courage and patience of the brave soldier for the country. In this time of trouble, the Punjab government is with the family and every possible help will be provided as promised. For us, our soldiers are our pride, even if they are Agniveer.
Mumbai: School receives threatening email
A bomb threat email has been received in a school in Jogeshwari’s Oshiwara area in Mumbai. Mumbai Police and Bomb Squad team reached the spot and investigated. However, nothing suspicious was found.
UP CM Yogi Adityanath will reach Kiradi shortly
UP CM Yogi Adityanath will reach Kiradi today shortly, where he will address a public meeting. This is CM Yogi’s first public meeting in the Delhi Assembly elections. Apart from Kiradi, CM Yogi will also address public meetings in Karol Bagh and Janakpuri.
Rahul Gandhi’s rally in Delhi cancelled
Congress MP Rahul Gandhi was scheduled to hold a rally in Mustafabad, Delhi today but due to his ill health, today’s rally has been cancelled.
AAP means Alcohol Affected Party – Pawan Khera
Congress leader and spokesperson Pawan Khera has described the Aam Aadmi Party (AAP) as an Alcohol Affected Party.
Saif Ali Khan’s security increased
Saif Ali Khan’s security has been enhanced. Saif has been provided 1+1 security. Mumbai Police is now analyzing Saif’s threat perception. Mumbai Police can enhance more security personnel according to the threat perception. Saif Ali Khan will receive 24×7 security. At present, police personnel will be with Saif 24 hours a day. In the coming days, many other small and big film personalities may receive security.
Legal notice to Parvesh Verma for his statement on Punjabis
Many people from Punjab and Delhi have sent a legal notice to Parvesh Verma today. A notice has been sent for the statement made on Punjabis. Parvesh Verma had said that vehicles with Punjab number plates are a threat to security.
UP government minister Nitin Agarwal’s sister Ruchi Goyal has been duped
UP government minister Nitin Agarwal’s sister Ruchi Goyal has been duped. She was duped with money in the name of getting a flat in Mumbai. UP police have arrested former MLA Subhash Pasi in this case. The former MLA will be produced in court today. Suresh Pasi has been an MLA from Ghazipur’s Saidpur seat twice.
Bihar: Vigilance team raids house of an education department official in Bettiah
A machine has been ordered to count notes at the house of an education department official in Bettiah, Bihar, as a vigilance team raids it.
We will end unemployment in Delhi in the next 5 years – Kejriwal
Aam Aadmi Party national convenor Arvind Kejriwal said that our top priority in the next 5 years will be to end unemployment in Delhi. My team is preparing a plan to create employment opportunities.
Case registered under UAPA against British Sikh Jagjit Singh of Punjab origin
Punjab Police has filed a case under UAPA against British Sikh soldier Jagjit Singh of Punjab origin. Jagjit Singh is a resident of Tarn Taran district and had gone to Britain in 2010. Two FIRs have been lodged in the case of an attack on the police post in Gurdaspur, in which Jagjit Singh has been named.
The atmosphere of fear in Kalkaji, Atishi wrote a letter to the election officer
Delhi CM Atishi said BJP’s Ramesh Bidhuri and his goons are creating an atmosphere of fear in Kalkaji to influence the elections. People are being abused and beaten up. Ramesh Bidhuri is threatening people over the phone. Atishi has written a letter to the election officer.
Mumbai: Bulldozers run on 34 illegal buildings in Nallasopara
Bulldozers are being run on 34 illegal buildings in Nallasopara, Mumbai.
Saif attack case: DNA test of accused Shariful’s hair will be done
New revelations are coming in every day in the Saif Ali Khan case. Now DNA test of Shariful’s hair, one of the accused of this attack, will be done.
Delhi elections: At 2 pm, a meeting of Purvanchal leaders of BJP
BJP has formed a team of Purvanchal leaders to woo Purvanchal voters. From today, BJP leaders from eastern India will enter the electoral fray in Delhi. Before that, a meeting of all the leaders deployed in Delhi will be held at 2 pm. Organization minister BL Santosh, BJP general secretary Tarun Chugh, and Harish Dwivedi will attend the meeting.
Gang war in Mokama, Bihar, FIR against Sonu-Monu gang, investigation intensified
In Mokama, Bihar, former MLA Anant Singh was fired upon. In this, Anant Singh managed to save himself with difficulty. The responsibility for this firing has been given to the Sonu-Monu gang. FIR has been registered against this gang. Investigation into the attack case of Singh has intensified. BJP showed its muscle in Delhi Elections, JP Nadda-CM Yogi will campaign heavily
Delhi saw the strength of big leaders in the electoral battle. Today, JP Nadda and CM Yogi will campaign intensely. Rahul Gandhi will also conduct a public rally in Mustafabad area.
Today is the 99th birthday of Balasaheb Thackeray
Today is the 99th birthday of Balasaheb Thackeray. There are many programmes organised by Shiv Sena today.
Many flights will be rescheduled due to fog in Delhi.
It rained in Delhi last night, after which the cold has increased once again. The fog is visible again, due to which many flights taking off from Indira Gandhi Airport have been cancelled.
Home Minister Amit Shah will visit Gujarat today
Home Minister Amit Shah will be on a tour of Gujarat today.
Mumbai: Bulldozer will run on 34 illegal buildings in Nalasopara today
In the coming day, bulldozers are going to run on 34 illegal buildings in Nalasopara along with Mumbai in Maharashtra. On the orders of the Bombay High Court, this action will be taken today. The administration has deployed over 400 policemen to maintain security. 41 illegal buildings have been constructed on land reserved for a dumping ground and STP plant at Lakshmi Nagar located in Agarwal Nagari, Nalasopara East. The Bombay High Court has declared these buildings illegal and ordered their demolition. Earlier, 7 illegal buildings were demolished.
BJP leaders from eastern India will enter the electoral fray in Delhi today
Delhi BJP has formed a team of eastern leaders to woo eastern voters. About 100 leaders from UP and Bihar have been given responsibility for this. Former MP and Assam BJP in-charge Harish Dwivedi has been made its convener. BJP leaders from eastern India will enter the electoral fray in Delhi from today.
Today, a meeting will be held in Niranjani Akhara regarding the Sanatan Board
Today (Thursday) a meeting will be held in Niranjani Akhara regarding the Sanatan Board. A press conference will be held in Niranjani Akhara at 11 am regarding the Sanatan Board. On this occasion, Akhada Parishad President Ravindra Puri Maharaj, Devkinandan Thakur, Mahamandaleshwar Balakanand Maharaj and other saints will be present.
We did not stop trade with Pakistan, it was their decision: S Jaishankar
External Affairs Minister S Jaishankar, on Wednesday, addressed the press on India’s trade relations with Pakistan. In the conference, he made it clear that New Delhi didn’t stop the trade with Islamabad. The decision to stop trade had been taken by Pakistan in 2019. He even reiterated the long-standing concern of the country over MFN status. He said, ‘Our concern on this issue was from the beginning that we should get MFN status. We used to give this status to Pakistan.
Brand of India” has been strengthened under PM Modi’s leadership: CM Naidu
Andhra Pradesh Chief Minister N Chandrababu Naidu attended the World Economic Forum’s annual meeting in Davos on Wednesday. “The brand of India has been strengthened under the leadership of the Prime Minister. India is very strong, and well-recognized by the global community, global investors and all countries. This is the message.”. This Davos is giving some ideas to the global community. We are already implementing all the ideas. So we have to strengthen our implementation.’
I am saddened by the tragic accident on the railway track in Jalgaon: PMO
The Prime Minister’s Office wrote in an ‘X’ post, ‘I am sad over the tragic accident on the railway track in Jalgaon, Maharashtra. I offer my condolences to the families of the victims and pray for the early recovery of all the injured. The officials are providing all possible assistance to the affected people.
UP CM Yogi Adityanath will enter the Delhi assembly elections today. CM Yogi will hold 3 public meetings in Delhi. The third public meeting will be held at Kiradi at 3.30 pm, Karol Bagh at 4.50 pm and Janakpuri assembly constituency at 6 pm.
UP CM Yogi Adityanath will enter the Delhi assembly elections today.
CM Yogi will hold 3 public meetings in Delhi today. The first rally will be at the Kiradi assembly at 3.30 pm. Then the third public meeting will be held at Karol Bagh at 4.50 pm and Janakpuri assembly constituency at 6 pm. There will be a meeting regarding the Sanatan Board in Niranjani Akhara today. A press conference will be held regarding the Sanatan Board at Niranjani Akhara at 11 am.
On this occasion, Akhada Parishad President Ravindra Puri Maharaj, Devkinandan Thakur, Mahamandleshwar Balakanand Maharaj and other saints will be present. Delhi BJP has formed a team of Eastern leaders to woo Eastern voters. About 100 leaders from UP and Bihar have been given responsibility for this. Former MP and Assam BJP in-charge Harish Dwivedi has been made its convener. From today, BJP leaders from Eastern India will enter the electoral fray in Delhi.
Tejashwi termed it a criminal disorder
Tejashwi Yadav termed the firing between two groups near Patna on Wednesday as “criminal disorder”. He expressed surprise at the law and order situation in the state and urged Chief Minister Nitish Kumar to “come to his senses”.
He said law and order in Bihar has become a criminal disorder. Criminals in the state have full protection. People in power are giving protection to these criminals. People should come together and overthrow this government. When we form the government, no criminal will be spared.
Yadav, who leads the Rashtriya Janata Dal or RJD, said we will show how to strengthen law and order. This is not a double-engine government – here one engine represents criminals, while the other engine is of corruption.
Tejashwi raises questions on law and order
Yadav claimed that the Chief Minister, who also holds the Home portfolio, should come out and tell the people what is happening in the state. However, the police have ruled out the possibility of a gang war and said that one side only opened fire in retaliation as claimed by the villagers. It does not seem to be a gang war. The police said that the case had been registered based on a complaint lodged by a family.
Contradictory statements are coming from the area, according to the police. We are investigating them. A section of villagers have claimed that on the instructions of former MLA Anant Singh, his supporters initially fired a few bullets. The police officer said that some people have claimed that there was a firing between the two groups.
Why is Rahul Gandhi not holding a rally are questions being raised
The Congress has cited health as the reason behind cancelling Rahul Gandhi’s rally, but questions are also being raised on the Congress’ argument because Delhi is the national capital. Rahul was going to go to Belgaum 2 days ago, but could not go. Rahul sent Priyanka Gandhi there in his place.
All the big leaders of Congress stay in Delhi. Other than Rahul, Sonia Gandhi, Priyanka Gandhi and Mallikarjun Kharge are also star campaigners from the high command. It is being said that Rahul could have sent one of them in his place, but the Congress decided to cancel the rally.
One reason for the questions being raised is the absence of rallies of big leaders. While Rahul’s rally is being cancelled, no big leader from the high command has come to campaign in the battle of Delhi so far.
In 2021, Rahul Gandhi gradually cancelled all his rallies in Bengal in the same way. When he had not cancelled his rally to support Mamta Banerjee, Rahul Gandhi had shown support behind the scenes. A ruckus later erupted over Rahul’s rally at the Congress meeting.
Question to BJP- What is cooking?
BJP MP Ravi Shankar Prasad has targeted Rahul Gandhi over his rallies being continuously cancelled. Prasad says that Rahul Gandhi and Arvind Kejriwal are trying to form a new alliance. This is the reason why Congress has become inactive in the field.
Prasad further stated that most of the big leaders of Congress are not actively campaigning in the elections. Congress has left only Sandeep Dixit against Arvind Kejriwal. Dixit is fighting alone against the Aam Aadmi Party in the field.
Voting for 70 assembly seats in Delhi is proposed on February 5. Big leaders will be able to hold rallies in favor of the candidates only till February 3.
Houthi rebels are assaulting American warships with these four missiles
The US Naval Force locks in the biggest combat operation since World War II with Yemeni Houthi powers in the Red Sea.
Houthi rebels have terminated rockets on America’s flying machine carriers and commercial ships. Or have assaulted with drones.
The US Naval Force is battling the greatest fight since the Second World War. The adversary is the Houthi rebels. Who are continually assaulting American warships and commercial ships with rockets. America has named this war Operation Success Gatekeeper. From December 2023 till presently, Houthi rebels have caused a parcel of pulverization with their rocket attacks.
Houthi rebels in Yemen have kept the US government alert. The US Naval Force is always assaulting warships and commercial ships with rockets and rambles. US President Joe Biden said in January this year that America is battling the greatest fight since the Second World War. The US has propelled Operation Success Gatekeeper so that it can battle against the Houthi rebels along with its allies.
Despite this, the Houthi rebels are not concurring. They assault all the American warships in the Ruddy Ocean or the commercial ships related to it with rockets. This war has expanded since December final year. Due to these assaults, the way of around thousands of ships was occupied. 20 nations were influenced due to privateers. The Houthi rebels get rockets from Iran. Or they make rockets like Iran.
More than three dozen assaults have been made on worldwide commercial ships. 50 nations are influenced by these assaults. The US and its 40 inviting nations together are too incapable to confront the Houthi rebels. Since the Houthis are all of a sudden and ambushing with rockets. Let us know around those rockets of the Houthi rebels that they are utilizing the most.
Asef
This rocket is based on the plan of Iran’s Fateh-313 rocket. Its run is 450 to 500 kilometers. It is an anti-ship ballistic rocket. It is around 29 feet long. It has tail blades. Its distance across is 2 feet. It can carry a weapon weighing 380 kg. There is no official data around its speed, but it is accepted that it flies at a speed of 4500 to 5700 km/hr.
Tankil
This rocket is considered to be a clone of the Raad 500 rocket. Its extend is 500 kilometers. It is a surface-to-surface ballistic rocket. It works on infrared searcher innovation. 300 kg of weapons can be stacked in it. Which is sufficient to sink any expansive warship.
Al-Mandab-2
The Houthi variation of Iran’s Noor rocket. Its run is 300 kilometers. It is an anti-ship voyage rocket that navigates on radar homing. It has a warhead weighing 185 kg.
Quds Z-0
It is a duplicate of Iran’s Paveh 351 journey rocket. Or maybe it is a correct copy. Its extend is 800 kilometers. Not much data is accessible, almost.
Massive protests against Netanyahu, Israeli people angry with the death of 6 hostages
The Israel-Hamas War is still going on after the death of thousands of people. With each passing day, the number of people losing their lives in the war is increasing, but the war does not stop. The Israeli Defense Forces have recovered the bodies of six hostages from the Rafah area of the Gaza Strip. Since then, the series of protests against Prime Minister Benjamin Netanyahu and his government has intensified in Israel. It is alleged that Netanyahu is not taking any serious steps for the release of the hostages.
The pressure on Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu to send the hostages back home is increasing. Millions of people have come out on the streets of Israel and are constantly demanding Netanyahu reach an agreement with Hamas. Amidst the protests against Netanyahu, Defense Minister Yoav Galant has said that time is running out. Galant’s statement is not a good sign for the government running on the crutches of six parties, and this is leading to differences emerging within the government itself.
Differences emerge between Netanyahu and Galant
Various Israeli channels have said that there was a heated debate between PM Netanyahu and Defense Minister Galant in the security cabinet meeting held on Thursday. The question between the two was whether the 14-kilometer Philadelphia corridor should be left as part of the agreement. This corridor is on the border between Gaza and Egypt. This corridor is currently being controlled by the Israeli Defense Forces.
The deployment of Israeli soldiers here has been a major issue of dispute with Hamas in the first phase of the ceasefire agreement. Hamas wants the Israeli army to withdraw from this area. Netanyahu wants the IDF to remain in this corridor, while Galant says that Hamas will not agree to this, so there will be no agreement and no hostage will be released.
Galant also warned that if we continue on this path, we will not be able to achieve the goals we have set for ourselves.
The government is also on the target of the opposition
The opposition in Israel is also surrounding the government. According to a media report, opposition leader Yair Lapid has criticized the government for not making any agreement ‘despite the circumstances allowing’.
Lapid said that Hamas is not responsible for our children. The Israeli government is responsible for this, and they should have made a hostage agreement, which was doable and should have been done a month ago.
What did Netanyahu say after the bodies of the hostages were found?
After the bodies of the hostages were found, Netanyahu has warned Hamas in very strong words. He said that whoever has killed our people, we do not want any compromise. We will find them and take them to account. Netanyahu also said that we will not rest and will not remain silent. We will chase you, catch you, and settle the account. Netanyahu’s warning shows that he is not in favor of any compromise. In such a situation, public protest can become more widespread.
Netanyahu recently said that Israel, with the support of the US, had agreed to a deal to release the hostages on 27 May 2023, but Hamas rejected the proposal. Netanyahu has condemned Hamas for refusing to negotiate.
Massive protests in Israel
Massive anti-government protests are taking place in Israel. Millions of people gathered outside the Knesset in Jerusalem. Protests have been seen in many small and big cities of Israel, including Jerusalem and Tel Aviv.
After the bodies of the hostages were recovered, the Israel Hostages and Missing Families Forum has announced massive protests across the country. The forum called for protests against the government. The forum said that the government left the hostages to die and no efforts were made for their release.
Systems affected due to the strike of the labor union
Finance Minister Bezalel Smotrich has demanded the Israel Labor Court dismiss the strike. The strike has partially affected air, bus and rail services. At the same time, employees of Israel’s main commercial port Haifa, are also on strike. Hospitals were partially working and banks did not work.
One American is also among the bodies of the hostages found
Israel’s Foreign Ministry said in a post on the social media platform X that the bodies of six hostages have been found from the tunnel of Rafah. They have been identified as Harsh Goldberg, Eden Yerushalmi, Carmel Gat, Almog Sarousi, Alex Lubnov and Ori Danino. US President Joe Biden said that Israeli forces recovered the bodies of six people held hostage by Hamas. One of the hostages was American citizen Harsh Goldberg-Polin. Earlier on April 24, Hamas released a video in which Goldberg-Polin said that the captives were living in “hell”.
Hamas still has more than 100 hostages
Hamas attacked Israel on 7 October and took about 250 people hostage. 100 hostages were released during the ceasefire in November last year. At the same time, it is being said that 35 have died. However, more than 100 hostages are still being reported to be in the custody of Hamas.
Only two seats more than the majority
During the elections held in Israel in November 2022, Netanyahu’s coalition government won a total of 63 seats in the 120-seat parliament. Out of which Netanyahu’s Likud party got 32 seats. 61 seats are necessary for a majority in Israel, and in such a situation, Netanyahu is on the edge.
Differences between Netanyahu and Defense Minister Yoav Galant are also raising many questions. Yoav Galant started his political journey through the Kulanu party and later joined Likud. In such a situation, it remains to be seen what direction his anger will take.
Paris Paralympics 2024: everything you ought to know approximately the Games
Paris Paralympics 2024:
The French capital has 11 days of tip-top competition that will deliver modern stars at a range of point-of-interest venues:
What are the Paralympic Games?
Eleven days of first-class competition over 22 sports. With no less than 549 awards at stake, 4,400 competitors will be taking portion from 128 distinctive countries, each of them with a physical or cognitive disability.
When does it start?
The opening ceremony for the 17th summer Paralympic Recreations will take place in Paris on Wednesday, 28 Eminent, from 7pm UK time. As with the Paralympics this summer, the ceremony will be organized not in a stadium but in the city, with the area moving from the Stream Seine to the Champs Élysées. A “people’s parade” will be available to the common open some time recently arriving at the Put de la Concorde, once in the past the location of the Paralympics “parc urbain,” which will at that point organize the climactic parcel of the evening and the lighting of the Paralympic burn. The wearing activity starts another day.
Where will the game be played?
A number of the settings you fell in love with prior in the summer are set to return, with 18 of the 35 Paralympics areas being repurposed for the Paralympics. The Stade de France and La Défense Field will once again have games, and swimming, individually, and cycling will return to the Saint-Quentin-en-Yvelines Velodrome. The sand has been evacuated from the Eiffel Tower stadium so that dazzle football can supplant shoreline volleyball. As it were occasion to be held outside the French capital, the para-shooting in Châteauroux.
What time will the activity be on?
You have likely as of now balanced your body clock to the challenges of expending money from the French capital, and for those in the UK it’s not exceptionally difficult (it’s an hour ahead). The don will start at 8.30am in the morning at the at the nearby time and conclude at 10.30pm.
What are the key events?
Much like the Paralympics, the centrepiece of the Paralympics Diversions is the track and field program. The competition starts on Friday, 30 Admirable, runs for nine days, and produces awards each day. Both Saturdays are especially stuffed, with 7 September gloating over no less than 22 finals over its two sessions. Other marquee occasions to watch out for will be the wheelchair rugby last on Monday 2 September and finals day in the para-rowing at Vaires-sur-Marne Naval Stadium on Sunday 1 September.
Which British stars ought to we see out for?
Of the 215 competitors that frame the ParalympicsGB group this year, there are 81 debutants, meaning an incredible chance for modern heroes to be made. Among those new names, look out for 19-year-old cyclist Archie Atkinson (dashing in the C4 interest), 13-year-old swimming wonder Iona Winnifrith (going in the SB7 100m breaststroke and SM7 person variety), and Rachel Choong, world winner in para-badminton, who is making her make a big appearance at the Diversions after her classification was at last included in competition.
What is a ‘classification’?
One noteworthy example of incapacity don is that competitors are chosen for competition based on the nature and seriousness of their incapacity. In order to guarantee reasonable competition, all competitors must go through the classification process, where they are evaluated by specialized and therapeutic specialists to guarantee they are chosen in a suitable category. This is one of the reasons why there are so numerous decorations; there are handfuls of diverse classifications, particularly in track and field.
Classification can be the cause of colossal disillusionment, with competitors some of the time being prohibited from competition since their impedance is not judged to be incredible sufficient. It is moreover a political issue, with a talk about whether there ought to be more classifications in order to permit more incorporation or less to improve competitiveness.
How can I observe the Paralympic games?
There are still as numerous as 500,000 tickets accessible for the diversion, with specific accessibility in track and field at the 80,000 capacity Stade de France. There are too additional tickets anticipated to be made accessible at a few of the sold-out sports: wheelchair fencing, para-taekwondo, para-cycling, para-equestrian, marathon, para-shooting and daze football.
In the UK, Channel 4 is promising its most broad scope, however, with over 1,300 hours of live broadcasting and up to 18 concurrent live streams running on its YouTube channel. It will moreover be its most comprehensive to date, with subtitles for each broadcast and closed-sound portrayal on Channel 4 at primetime, whereas live wear on More4 and Channel 4 Spilling on weekday evenings will incorporate British sign dialect live marking. The BBC, in the interim, will be giving radio coverage.
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